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अकबर इलाहाबादी Akbar Allahabadi

Akbar-Allahabadi

अकबर इलाहाबादी 
Akbar Allahabadi

अकबर इलाहाबादी ने सैयद अकबर हुसैन के नाम से १८४६ में इलाहाबाद के निकट बारा में एक सम्मानजनक, परिवार में जन्म लिया। उनके पिता का नाम सैयद तफ्फज़ुल हुसैन था।

अकबर इलाहाबादी ने अपनी प्राथमिक शिक्षा अपने पिता द्वरा घर पे ही ग्रहन की। उन्होंने 15 साल की उम्र में अपने दो या तीन साल वरिष्ठ लड़की से शादी की थी और जल्द ही उन्की दूसरी शादी भी हुइ। दोंनो पत्नीयों से अकबर के २-२ पुत्र थे। अकबर इलाहाबादी ने वकालत की अध्ययन करने के बाद बतौर सरकारी कर्मचारी कार्य किया।

हालांकि अकबर इलाहाबादी एक अनिवार्य रूप से एक जीवंत, आशावादी कवि थे, उसके बाद के जीवन में चीजों के बारे में उनकी दृष्टि घर पर उसकी त्रासदी के अनुभव से घिर गई थी। उन्के बेटे और पोते का निधन कम उम्र में ही हो गया। यह उसके लिये बड़ा झटका था और निराशा का कारण बना। फलस्वरूप वह अपने जीवन के अंत की ओर काफी, वश में हो गया और तेजी से चिंताग्रस्त और धार्मिक होने लगे थे। ७५ साल की उम्र में १९२१ में अकबर की मृत्यु हो गई।

अकबर इलाहाबादी एक शानदार, तर्कशील, मिलनसार आदमी थे। और उनकी कविता हास्य की एक उल्लेखनीय भावना के साथ कविता की पहचान थी। वो चाहे गजल, नजम, रुबाई या क़ित हो उनका अपना ही एक अलग अन्दाज़ था। वह एक समाज सुधारक थे और उनके सुधारवादी उत्साह बुद्धि और हास्य के माध्यम से काम किया था। शायद ही जीवन का कोई पहलू है जो उन्के व्यंग्य की निगाहों से बच गया था।

अकबर इलाहाबादी की प्रमुख संग्रह व प्रमुख रचनाएँ

गांधीनामा - अकबर इलाहाबादी
हंगामा है क्यूँ बरपा - अकबर इलाहाबादी
कोई हँस रहा है कोई रो रहा है - अकबर इलाहाबादी
बहसें फ़ुजूल थीं यह खुला हाल देर से - अकबर इलाहाबादी
दिल मेरा जिस से बहलता - अकबर इलाहाबादी
दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ - अकबर इलाहाबादी
समझे वही इसको जो हो दीवाना किसी का - अकबर इलाहाबादी
आँखें मुझे तल्वों से वो मलने नहीं देते - अकबर इलाहाबादी
पिंजरे में मुनिया - अकबर इलाहाबादी
उन्हें शौक़-ए-इबादत भी है - अकबर इलाहाबादी
दएक बूढ़ा नहीफ़-ओ-खस्ता दराज़ - अकबर इलाहाबादी
अरमान मेरे दिल का निकलने नहीं देते - अकबर इलाहाबादी
अकबर इलाहाबादी की प्रसिद्ध रचनाएँ
जो यूं ही लहज़ा लहज़ा दाग़-ए-हसरत की तरक़्क़ी है - अकबर इलाहाबादी
फिर गई आप की दो दिन में तबीयत कैसी - अकबर इलाहाबादी
कहाँ ले जाऊँ दिल दोनों जहाँ में इसकी मुश्किल है - अकबर इलाहाबादी
किस किस अदा से तूने जलवा दिखा के मारा - अकबर इलाहाबादी
कट गई झगड़े में सारी रात वस्ल-ए-यार की - अकबर इलाहाबादी
शक्ल जब बस गई आँखों में तो छुपना कैसा - अकबर इलाहाबादी
दम लबों पर था दिलेज़ार के घबराने से - अकबर इलाहाबादी
जान ही लेने की हिकमत में तरक़्क़ी देखी - अकबर इलाहाबादी
ख़ुशी है सब को कि आप्रेशन में ख़ूब नश्तर चल रहा है - अकबर इलाहाबादी
आपसे बेहद मुहब्बत है मुझे - अकबर इलाहाबादी
हिन्द में तो मज़हबी हालत है अब नागुफ़्ता बेह - अकबर इलाहाबादी
हिन्द में तो मज़हबी हालत है अब नागुफ़्ता बेह - अकबर इलाहाबादी
बिठाई जाएंगी पर्दे में बीबियाँ कब तक - अकबर इलाहाबादी
हस्ती के शजर में जो यह चाहो कि चमक जाओ - अकबर इलाहाबादी
तअज्जुब से कहने लगे बाबू साहब - अकबर इलाहाबादी
सूप का शायक़ हूँ यख़नी होगी क्या - अकबर इलाहाबादी
चश्मे-जहाँ से हालते अस्ली छिपी नहीं - अकबर इलाहाबादी
हास्य-रस -एक - अकबर इलाहाबादी
हास्य-रस -दो - अकबर इलाहाबादी
हास्य-रस -तीन - अकबर इलाहाबादी
हास्य-रस -चार - अकबर इलाहाबादी
हास्य-रस -पाँच - अकबर इलाहाबादी
हास्य-रस -छ: - अकबर इलाहाबादी
हास्य-रस -सात - अकबर इलाहाबादी
ख़ुदा के बाब में - अकबर इलाहाबादी
मुस्लिम का मियाँपन सोख़्त करो - अकबर इलाहाबादी
जिस बात को मुफ़ीद समझते हो - अकबर इलाहाबादी
गाँधी तो हमारा भोला है - अकबर इलाहाबादी
मुझे भी दीजिए अख़बार - अकबर इलाहाबादी
शेर कहता है - अकबर इलाहाबादी
बहार आई - अकबर इलाहाबादी
आबे ज़मज़म से कहा मैंने - अकबर इलाहाबादी
शेख़ जी अपनी सी बकते ही रहे - अकबर इलाहाबादी
हाले दिल सुना नहीं सकता - अकबर इलाहाबादी
हो न रंगीन तबीयत - अकबर इलाहाबादी
मौत आई इश्क़ में - अकबर इलाहाबादी
काम कोई मुझे बाकी नहीं - अकबर इलाहाबादी
तहज़ीब के ख़िलाफ़ है - अकबर इलाहाबादी
हम कब शरीक होते हैं - अकबर इलाहाबादी
मुँह देखते हैं हज़रत - अकबर इलाहाबादी
अफ़्सोस है - अकबर इलाहाबादी
ग़म क्या - अकबर इलाहाबादी
उससे तो इस सदी में - अकबर इलाहाबादी
ख़ैर उनको कुछ न आए - अकबर इलाहाबादी
जो हस्रते दिल है - अकबर इलाहाबादी
मायूस कर रहा है - अकबर इलाहाबादी
गांधीनामा - अकबर इलाहाबादी
वो हवा न रही वो चमन न रहा - अकबर इलाहाबादी
सदियों फ़िलासफ़ी की चुनाँ - अकबर इलाहाबादी
जो तुम्हारे लब-ए-जाँ-बख़्श - अकबर इलाहाबादी
जहाँ में हाल मेरा - अकबर इलाहाबादी
हूँ मैं परवाना मगर - अकबर इलाहाबादी
ग़म्ज़ा नहीं होता के - अकबर इलाहाबादी
चर्ख़ से कुछ उम्मीद थी ही नहीं - अकबर इलाहाबादी
हर क़दम कहता है तू आया है जाने के लिए - अकबर इलाहाबादी