तुम्हारा मैसेज - अभिषेक मिश्र | Tumhara message - Abhishek Mishra

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"तुम्हारा मैसेज"

पढ़ा तो था पहले भी , 
पर समझने में मुझसे भूल गई,
जिसे समझा था मैंने सिर्फ एक मैसेज,
उसके अंदर थे तुम्हारे अनकहे जज्बात,
जिन्हें सम्भाल के रखा था तुमने सिर्फ मेरे लिए,
जो कभी कह न पाए थे तुम मुझसे,
अब जब तुम दूर जा रहे हो,
तो तुम्हें समझ रहा हूँ,
तुम्हारी उस पल की उदासी को,
आज जब फिर से देखा इसको, 
तो आँखें सजल हो गयी फिर मेरी
अश्रु झर झर गिरने लगे है स्क्रीन पर,
मन व्याकुल है ,मौन हुए है स्वर मेरे,
खामोशी गर पढ़ सकते हो तो,
आओ बैठी कुछ क्षण पास मेरे,
अवरुद्ध कण्ठ से कहता हूं ,
जो कभी न कह पाया,
जिसे तुम भी शायद कभी समझ न पाई,
वो फिक्र वो तुम्हारा ख्याल,
उम्मीद से अब दिन है गुजरते,
जो चंद लम्हे बचे है साथ के,
उनको बिताते हैं कुछ याद से,
मिला है आज तुम्हारा मैसेज,
व्हाट्सएप्प का नोटिफिकेशन बता रहा है,
तुम्हारे इस मैसेज में बहुत कुछ है
तुम्हारी सच्ची भावनाएं,
तुम्हारा मेरे लिए चिंता करना,
तुम्हारा अनमोल अगाध प्रेम,
बिन देखे ही मैसेज तुम्हारा ,
महसूस कर लिया है सब कुछ,
फिर भी बिना देखे चैन कहाँ,
उँगलियों से छू कर के देखूंगा,
महसूस करूँगा तुम्हारा मेरे लिए प्यार,
पढ़ने के लिए दिल है बेकरार,
मोबाइल को अपने हाथों में लेके,
निरभ्र इस आकाश के नीचे,
चंद्र ज्योत्स्ना की शीतलता में तुम्हारी मौजूदगी,
विषय इसका कोई तो जरूर है,
तुम्हारी भावना मुखर होने को मजबूर है,
क्या लिखा है?
इतने दिन बाद लिखा है,
रिश्ते की याद लिखा है,
लिखा है तुमने इसे हर्ष से,
या फिर लिखा है तुमने अमर्ष से ,
लिखते हुए तुम्हारी नाजुक उंगलियों ने,
कीपैड को छुआ ही होगा,
झील सी गहरी आँखों ने,
कुछ पल तो निहारा होगा,
हाँ ये लिखने की थी मेरी इच्छा,
अकल्पित मिलन की थी प्रतीक्षा,
अब बिछड़ने का सोच के,
पढ़ते हुए उसे हाथों का कांपना,
तुम्हारी याद का आना,
नयनों से अश्रु का गिरना,
मैंने जो कहा था,
वही सब लिखा है तुमने,
इसकी भाषा बड़ी शालीन सी है,
तपती धूप में मखमली कालीन सी है।।
                        
अभिषेक मिश्र -

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