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गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' Gayaprasad Shukla 'Sanehi'

Gayaprasad-Shukla-Sanehi


गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' 
Gayaprasad Shukla 'Sanehi'

गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' का जन्म 16 अगस्त 1883 उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के हड़हा नामक ग्राम में हुआ था। उनके पिता का नाम पंडित अवसेरीलाल शुक्ल तथा माता का नाम श्रीमती रुक्मिणी देवी था। नौ वर्ष की आयु में उनका उपनयन संस्कार हुआ तथा तेरह वर्ष की अवस्था में उन्नाव के ही जैतीपुर ग्राम के निवासी स्वनामधर्मा श्री पंडित गयाप्रसाद जी की पुत्री भिक्षुणी देवी के साथ उनका विवाह हुआ था। हिन्दी साहित्य के आधुनिक काल के द्विवेदी युगीन साहित्यकार हैं। इन्होंने 'सनेही' उपनाम से कोमल भावनाओं की कविताएँ, 'त्रिशूल' उपनाम से राष्ट्रीय कविताएँ तथा 'तरंगी' एवं 'अलमस्त' उपनाम से हास्य-व्यंग्य की कविताएँ लिखीं। इनकी देशभक्ति तथा जन-जागरण से सम्बद्ध कविताएँ अत्यधिक प्रसिद्ध रही हैं।
गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' की कविताएँ Gayaprasad Shukla Sanehi Ki Kavita
असहयोग कर दो - गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' किसान - गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'
कोयल - गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' ग्रीष्म स्वर्णकार बना - गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'
घूमें घनश्याम स्यामा - गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' दर्पण में हिय के वह मूरति - गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'
नारी गही बैद सोऊ बेनि - गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' परतंत्रता की गाँठ - गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'
प्रभात किरण - गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' पावन प्रतिज्ञा - गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'
बदरिया - गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' बुझा हुआ दीपक - गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'
बौरे बन बागन विहंग विचरत बौरे - गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' भक्त की अभिलाषा - गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'
भारत संतान - गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' मज़दूरों का गीत - गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'
राष्ट्रीयता - गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' वह हृदय नहीं है पत्थर है - गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'
शैदाए वतन - गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' संकित हिये सों पिय अंकित सन्देशो बांच्यो - गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'
सागर के उस पार - गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' साम्यवाद - गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'
सुभाषचन्द्र - गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' सूर है न चन्द है - गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'
हमारा प्यारा हिन्दुस्तान - गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'