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सोहर लोक-गीत Sohar Lok-Geet

सोहर लोक गीत
Sohar Lok Geet

सोहर घर में संतान होने पर गाया जाने वाला मंगल गीत है भारत मे संतान के जन्म पर खुशी मै गाया जाने वाला गीत। संतान के जन्म और उससे संबंधित अवसरों जैसे सतमासा, इत्यादि अवसरों पर गाया जाता है। इन गीतों में श्री कृष्ण की बाल हट लीला का भी वर्णन होता है , उससे संबंधित कहानियों और उत्सवों के सुंदर वर्णन मिलते हैं। रामनवमी और कृष्णाष्टमी के अवसर पर भी सोहर गाने की परंपरा रही है ।

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लोकगीत सोहर हिन्दी- Lok-Geet Sohar

हुए देवकी के लाल, यशोदा जच्चा बनी

ले लूँगी भाभी रानी से कँगना

रुपईया मागें ननदी लल्ले की बधाई

क्या किए गोरी गगरिया के मोती

माथे लगी बेंदी, हाथों में लगी मेंहदी

एहसान मेरे दिल पर तुम्हारा है साजना

कर्फ़्यू ऑडर लागा है, गोरी मानो कहना

   

लोकगीत सोहर (ब्रज) Lok-Geet Sohar Brij


रानी देवकी ने जाये नंदलालरानी

दशरथ के चारों लालदशरथ के चारों लाल

जनमे राम हुए री आनन्द

श्याम झुलें पलना सो सजनीश्याम

पाँच पान पच बिड़ियाँपाँच पान पच

सौंठ के लड्डू चरपरे हैंसौंठ

कमर पीर होए राजा

कमर पीर ठीक हुई अब

कोई माँगे कढ़ाई न देकोई

मेरी जच्चा ने जाये शिरी

ब्रज में कान्ह हुए री

नन्द घर बाजे बधइयानन्द

जच्चा तो मेरी भोली-भाली

हमको तो पीर आवे, ननदी

पलँग पर अब ना चढ़ूँगी

मगन मन पूजन चली मोरी

गोंद सौंठ के लड्डू मेरे बाबुल

राजा ओ मेरे राजा

कहाँ गँवाए मेरी रानी

बोले न चाले मिज़ाज

उठी मेरे राजा कमर

द्वारे पे डाल लीनी खटिया

मचल रही आज महलों

माँगे ननद रानी कँगनामाँगे

सास तो दुबली हो गईसास तो

लाल के बधाए जड़ाऊ बेंदा

बहू कौन कौन फल

भए देवकी के लालभए देवकी

जच्चा मेरी ने ज़ुलम

ब्रज में बजत बधाईब्रज

जनम लियो रघुरइयाजनम

खड़ी-खड़ी ठेंगा दिखाऊँखड़ी

देखो ननद भवज कोठे

जो मन में आए सोई

तुझे चंदा कहूँ या

का घर मौरे हैं अम्बका


लोकगीत सोहर (भोजपुरी ) Lok-Geet Sohar Bhojpuri

अंगना में कुइयाँ खोनाइले

बबुआ बइठले नहाए

जेठ बइसखवा के पुरइन

सोने के खरउआ राजा रामचन्द्र

जुग जुग जियसु ललनवा

मोरे पिछवरवा चन्दन गाछ

मिली जुली गावे के बधइया

छापक पेड़ छिउलिया

मचिया ही बईठल कौशिल्या रानी

रघुबर के बहिना रानी रुकुमिनी

रुकुमिनी लिपी अईली पोति अईली

अपने ओसरवां कोशिल्या रानी


लोकगीत सोहर (अवधी ) Lok-Geet Sohar Awadhi

चैत मास तिथि नौमी

बंसी तो बाजी मेरे रंग-महल में

चलो चली सखिया सहेलिया

रामलला नहछूआदि सारदा

द्वारे से राजा आए

 


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