आवाज़ से लबों का बहुत फ़ासिला न था - वसीम बरेलवी Aawaazo Ka Labon Se Bahut Faasila Na Tha – Waseem Barelvi

Hindi Kavita

Hindi Kavita
हिंदी कविता

आवाज़ से लबों का बहुत फ़ासिला न था - वसीम बरेलवी
Aawaazo Ka Labon Se Bahut Faasila Na Tha – Waseem Barelvi


आवाज़ से लबों का बहुत फ़ासिला न था
लेकिन वो ख़ौफ़ था कि बोलता न था

आंसू को ऐतबार के क़ाबिल समझ लिया
मैं खुद ही छोटा निकला तेरा ग़म बड़ा न था

उसने ही मुझको देखा ज़माने की आंख से
जिसको मेरी नज़र से कोई देखता न था
Wasim-Barelvi
उन अजनबीयातों के सताये हैं इन दिनों
जैसे कभी किसी से कोई वासिता न था

हर मोड़ पर उम्मीद थी, हर सोच आरज़ू
खुद से फरार का भी कोई रास्ता न था

अपना यह अलमिया है कि हम ज़ेहनी तौर पर
उस शहर में रहे, जो अभी तक बसा न था

कैसी गिरावटों पे खड़ी थीं, मगर 'वसीम'
ऊँची इमारतों से कोई पूछता न था।

(getButton) #text=(Jane Mane Kavi) #icon=(link) #color=(#2339bd) (getButton) #text=(Hindi Kavita) #icon=(link) #color=(#2339bd) (getButton) #text=(Wasim Barelvi) #icon=(link) #color=(#2339bd) (getButton) #text=(मेरा क्या - बरेलवी) #icon=(link) #color=(#2339bd)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!